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वाल्मीकि रामायण 10.11

राजभावे नियुक्तो अहम् शून्य देश जिगीषया ।
स्निग्धम् एवम् ब्रुवाणम् माम् स विनिर्भर्त्स्य वानरः ॥४-१०-११॥

पूरा अध्याय