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वाल्मीकि रामायण 1.95

यदि दृश्येत सा साध्वी यदि च इह वसेम हि ।
स्पृहयेयम् न शक्राय न अयोध्यायै रघूत्तम ॥४-१-९५॥

पूरा अध्याय