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वाल्मीकि रामायण 1.93

एष कारण्डवः पक्षी विगाह्या सलिलम् शुभम् ।
रमते कान्ताया सार्थम् कामम् उद्दीपयन् इव ॥४-१-९३॥

पूरा अध्याय