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वाल्मीकि रामायण 1.75

गिरि प्रस्थास्तु सौमित्रे सर्वतः संप्रपुष्पितैः ।
निष्पत्रैः सर्वतो रम्यैः प्रदीप्ता इव किंशुकैः ॥४-१-७५॥

पूरा अध्याय