ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 11.72वाल्मीकि रामायण 1.72पद्म केसर संसृष्टो वृक्षान्तर विनिःसृतः । निःश्वास इव सीताया वाति वायुः मनोहरः ॥४-१-७२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय