ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 11.60वाल्मीकि रामायण 1.60अमी लक्ष्मण दृश्यन्ते चूताः कुसुम शालिनः । विभ्रम उत्सिक्त मनसः स अङ्गरागा नरा इव ॥४-१-६०॥पिछलाअगलापूरा अध्याय