ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 11.32वाल्मीकि रामायण 1.32कोकिलाकुल सीमान्तः दयिताया मम अनघः । मन्मध आयास संभूतो वसन्त गुण वर्धितः ॥४-१-३२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय