ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 11.24वाल्मीकि रामायण 1.24एष दाअत्यूहको हृष्टो रम्ये माम् वन निर्झरे । प्रणदन् मन्मथाविष्टम् शोचयिष्यति लक्ष्मण ॥४-१-२४॥पिछलाअगलापूरा अध्याय