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वाल्मीकि रामायण 1.15

मत्त कोकिल सन्नादैः नर्तयन् इव पादपान् ।
शैल कन्दर निष्क्रान्तः प्रगीत इव च अनिलः ॥४-१-१५॥

पूरा अध्याय