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वाल्मीकि रामायण 1.113

गच्छ लक्ष्मण पश्य त्वम् भरतम् भ्रातृउ वत्सलम् ।
न हि अहम् जीवितुम् शक्तः ताम् ऋते जनकात्मजम् ॥४-१-११३॥

पूरा अध्याय