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वाल्मीकि रामायण 8.20

शीघ्रम् तौ रूपसंपन्नौ अनुज्ञातौ महर्षिणा ।
प्रस्थितौ धृत चापा असी सीतया सह राघवौ ॥३-८-२०॥

पूरा अध्याय