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वाल्मीकि रामायण 75.19

किंनरोरगगन्धर्वयक्षराक्षससेविताम् -यद्वा - ।
किन्नर उरग गन्धर्व यक्ष राक्षस सेविताम् ।नाना द्रुम लता आकीर्णाम् शीत वारि निधिम् शुभाम् ॥३-७५-१९॥

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