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वाल्मीकि रामायण 75.17

रम्य उपवन संबाधाम् पद्म संपीडित उदकाम् ।
स्फटिक उपम तोय आढ्याम् श्लक्ष्ण वालुक संतताम् ॥३-७५-१७॥

पूरा अध्याय