ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 7474.34वाल्मीकि रामायण 74.34दिव्य अंबर धरा तत्र बभूव प्रिय दर्शन । विराजयन्ती तम् देशम् विद्युत् सौदामिनी यथा ॥३-७४-३४॥पिछलाअगलापूरा अध्याय