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वाल्मीकि रामायण 74.32

इति एवम् उक्ता जटिला चीर कृष्ण अजिन अंबरा ।
अनुज्ञाता तु रामेण हुत्वा आत्मानम् हुत अशने ॥३-७४-३२॥

पूरा अध्याय