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वाल्मीकि रामायण 73.7

नंदन प्रतिमम् तु अन्यत् कुरवः उत्तरा इव ।
सर्व काल फला यत्र पादपा मधुर स्रवाः ॥३-७३-७॥

पूरा अध्याय