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वाल्मीकि रामायण 73.17

पद्म गन्धि शिवम् वारि सुख शीतम् अनामयम् ।
उद्धृत्य स तदा अक्लिष्टम् रूप्य स्फटिक सन्निभम् ॥३-७३-१७॥

पूरा अध्याय