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वाल्मीकि रामायण 71.8

इन्द्र कोपात् इदम् रूपम् प्राप्तम् एवम् रण आजिरे ।
अहम् हि तपसा उग्रेण पितामहम् अतोषयम् ॥३-७१-८॥

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