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वाल्मीकि रामायण 7.9

स्वागतम् ते रघु श्रेष्ठ राम सत्यभृताम् वर ।
आश्रमओ अयम् त्वया आक्रान्तः सनाथ इव सांप्रतम् ॥३-७-८॥

पूरा अध्याय