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वाल्मीकि रामायण 7.5

प्रविष्टः तु वनम् घोरम् बहु पुष्प फल द्रुमम् ।
ददर्श आश्रमम् एकान्ते चीर माला परिष्कृतम् ॥३-७-४॥

पूरा अध्याय