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वाल्मीकि रामायण 7.3

स गत्वा दीर्घम् अध्वानम् नदीः तीर्त्वा बहु उदकाः ।
ददर्श विमलम् शैलम् महा मेरुम् इव उन्नतम् ॥३-७-२॥

पूरा अध्याय