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वाल्मीकि रामायण 69.47

उवाच लक्ष्मणम् रामो मुखेन परिशुष्यता ।
कृच्छ्रात् कृच्छ्रतरम् प्राप्य दारुणम् सत्य विक्रम ॥३-६९-४७॥

पूरा अध्याय