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वाल्मीकि रामायण 69.34

महान्तम् दारुणम् भीमम् कबंधम् भुज संवृतम् ।
कबंधम् इव संस्थानत् अति घोर प्रदशनम् ॥३-६९-३४॥

पूरा अध्याय