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वाल्मीकि रामायण 69.18

कर्ण नासे निकृत्ते तु विस्वरम् विननाद सा ।
यथा आगतम् प्रदुद्राव राक्षसी घोर दर्शना ॥३-६९-१८॥

पूरा अध्याय