ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 6868.9वाल्मीकि रामायण 68.9सा हृता राक्षसेन्द्रेण रावणेन दुरात्मना । मायाम् आस्थाय विपुलाम् वात दुर्दिन संकुलाम् ॥३-६८-९॥पिछलाअगलापूरा अध्याय