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वाल्मीकि रामायण 68.20

बहूनि रक्षसाम् वासे वर्षाणि वसता सुखम् ।
अनेन दण्डकारण्ये विशीर्णम् इह पक्षिणा ॥३-६८-२०॥

पूरा अध्याय