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वाल्मीकि रामायण 67.27

अयम् पितृ वयस्यो मे गृध्र राजो जरा अन्वितः ।
शेते विनिहतो भूमौ मम भाग्य विपर्ययात् ॥३-६७-२७॥

पूरा अध्याय