ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 6666.16वाल्मीकि रामायण 66.16तत्त्वतो हि नरश्रेष्ठ बुद्ध्या समनुचिंतय । बुद्ध्या युक्ता महाप्राज्ञा विजानन्ति शुभ अशुभे ॥३-६६-१६॥पिछलाअगलापूरा अध्याय