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वाल्मीकि रामायण 65.16

शीलेन साम्ना विनयेन सीताम्नयेन न प्राप्स्यसि चेत् नरेन्द्र ।
ततः समुत्सादय हेम पुंखैःमहेन्द्र वज्र प्रतिमैः शर ओघैः ॥३-६५-१६॥

पूरा अध्याय