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वाल्मीकि रामायण 65.1

तप्यमानम् तथा रामम् सीता हरण कर्शितम् ।
लोकानाम् अभवे युक्तम् सांवर्तकम् इव अनलम् ॥३-६५-१॥

पूरा अध्याय