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वाल्मीकि रामायण 64.77

पुरा इव मे चारु दतीम् अनिन्दिताम्दिशन्ति सीताम् यदि न अद्य मैथिलीम् ।
सदेव गन्धर्व मनुष्य पन्नगम्जगत् स शैलम् परिवर्तयामि अहम् ॥३-६४-७७॥

पूरा अध्याय