वाल्मीकि रामायण 64.60
संनिरुद्धग्रहगणमावारितनिशाकरम् ।
विप्रनष्टानलमरुद्भास्करद्युतिसंवृतम्।यद्व -संनिरुद्ध ग्रह गणम् आवारित निशा करम् ।विप्रनष्ट अनल मरुत् भास्कर द्युति संवृतम् ॥३-६४-६०॥
संनिरुद्धग्रहगणमावारितनिशाकरम् ।
विप्रनष्टानलमरुद्भास्करद्युतिसंवृतम्।यद्व -संनिरुद्ध ग्रह गणम् आवारित निशा करम् ।विप्रनष्ट अनल मरुत् भास्कर द्युति संवृतम् ॥३-६४-६०॥