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वाल्मीकि रामायण 64.51

वैरम् शत गुणम् पश्य मम तैः जीवित अंतकम् ।
सुघोर हृदयैः सौम्य राक्षसैः काम रूपिभिः ॥३-६४-५१॥

पूरा अध्याय