ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 6464.47वाल्मीकि रामायण 64.47भीम रूपा महाकायाः कस्य वा निहता रणे । दीप्त पावक संकाशो द्युतिमान् समर ध्वजः ॥३-६४-४७॥पिछलाअगलापूरा अध्याय