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वाल्मीकि रामायण 64.35

यदि न आख्याति मे सीताम् अद्य चन्द्र निभ आननाम् ।
एवम् प्ररुषितो रामो दिधक्षन् इव चक्षुषा ॥३-६४-३५॥

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