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वाल्मीकि रामायण 64.33

ततो दाशरथी राम उवाच शिलोच्चयम् ।
मम बाण अग्नि निर्दग्धो भस्मी भूतो भविष्यसि ॥३-६४-३३॥

पूरा अध्याय