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वाल्मीकि रामायण 64.31

ताम् हेम वर्णाम् हेम अंगीम् सीताम् दर्शय पर्वत ।
यावत् सानूनि सर्वाणि न ते विध्वंसयामि अहम् ॥३-६४-३१॥

पूरा अध्याय