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वाल्मीकि रामायण 64.29

उवाच रामो धर्मात्मा गिरिम् प्रसवण आकुलम् ।
कच्चित् क्षिति भृताम् नाथ दृष्टा सर्वांग सुंदरीम् ॥३-६४-२९॥

पूरा अध्याय