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वाल्मीकि रामायण 64.25

वसुन्धरायाम् पतित पुष्प मार्गम् अपश्यताम् ।
पुष्प वृष्टिम् निपतिताम् दृष्ट्वा रामो मही तले ॥३-६४-२५॥

पूरा अध्याय