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वाल्मीकि रामायण 62.8

न हि सा विलपंतम् माम् उपसम्प्रैति लक्ष्मण ।
एतानि मृग यूधानि स अश्रु नेत्राणि लक्ष्मण ॥३-६२-८॥

पूरा अध्याय