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वाल्मीकि रामायण 62.20

इति विलपति राघवो तु दीनोवनम् उपगम्य तया विना सु केश्या ।
भय विकल मुखः तु लक्ष्मणो अपिव्यथित मना भृशम् आतुरो बभूव ॥३-६२-२०॥

पूरा अध्याय