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वाल्मीकि रामायण 61.30

तम् सान्त्वयामास ततो लक्ष्मणः प्रिय बान्धवम् ।
बहु प्रकारम् शोक आर्तः प्रश्रितः प्रश्रित अंजलिः ॥३-६१-३०॥

पूरा अध्याय