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वाल्मीकि रामायण 61.13

पंकम् आसाद्य विपुलम् सीदन्तम् इव कुंजरम् ।
लक्ष्मणो रामम् अत्यर्थम् उवाच हित काम्यया ॥३-६१-१३॥

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