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वाल्मीकि रामायण 60.6

रुदन्तम् इव वृक्षैः च ग्लान पुष्प मृग द्विजम् ।
श्रिया विहीनम् विध्वस्तम् संत्यक्त वन दैवतैः ॥३-६०-६॥

पूरा अध्याय