ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 6060.23वाल्मीकि रामायण 60.23अथवा मृग शाब अक्षीम् मृग जानासि मैथिलीम् । मृग विप्रेक्षणी कांता मृगीभिः सहिता भवेत् ॥३-६०-२३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय