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वाल्मीकि रामायण 60.15

ककुभः ककुभ ऊरुम् ताम् व्यक्तम् जानाति मैथिलीम् ।
लता पल्लव पुष्प आढ्यो भाति हि एष वनस्पतिः ॥३-६०-१५॥

पूरा अध्याय