ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 5959.8वाल्मीकि रामायण 59.8सा तम् आर्त स्वरम् श्रुत्वा तव स्नेहेन मैथिली । गच्छ गच्छ इति माम् आह रुदन्ती भय - विक्लवा - विह्वला ॥३-५९-८॥पिछलाअगलापूरा अध्याय