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वाल्मीकि रामायण 59.20

एवम् उक्तो हि वैदेह्या संरब्धो रक्त लोचनः ।
क्रोधात् प्रस्फुरमाण ओष्ठ आश्रमात् अभिनिर्गतः ॥३-५९-२०॥

पूरा अध्याय