ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 5959.13वाल्मीकि रामायण 59.13राक्षसेन ईरितम् वाक्यम् त्रसात् त्राहि इति शोभने । न भवत्या व्यथा कार्या कुनारी जन सेविता ॥३-५९-१३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय