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वाल्मीकि रामायण 59.1

अथ आश्रमात् उपावृत्तम् अंतरा रघुनंदनः ।
परिपप्रच्छ सौमित्रिम् रामो दुःख अर्दितः पुनः ॥३-५९-१॥

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